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नमस्ते ट्रंप और ‘उनकी’ प्रेम वार्ता

व्यंग्य  डोनाल्ड ट्रंप अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ गांधी की भूमि अहमदाबाद पहुंचे। उनकी सुरक्षा के लिए भारी-भरकम अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का काफिला था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां तो उनके आस-पास नजऱ नहीं आई जबकि प्रधानमंत्री मोदी उनके संग-संग रहे। ऐसा लगा जैसे ट्रंप को भारतीय सुरक्षा बंदोबस्त पर कम भरोसा था। दोस्ती में तो अंधविश्वास व समर्पण भाव होता है। ट्रंप की सुरक्षा कंपनी में कुछ खास किस्म के खोजी कुत्ते भी आए थे, उनमें एक ‘एलिन’ नामक कुतिया भी थी। बिलकुल गोरी। न ज्यादा मोटी, और न ज्यादा पतली, पूरी चौकस थी। उसके छरहरे बदन पर सुनहरे बाल थे। आंखें ऐसी, जैसे नीले रंग के दो कंचे हों। लंबी व मोटी पूंछ ऐसे डोल रही थी मानो उसका सीधा संबंध व्हाइट हाऊस के कंट्रोल आफिस से हो। गले में ब्लैक कलर की पट्टी उसकी खुबसूरती को चार चांद लगा रही थी। कमाल की बात यह है कि वह किसी रस्सी से नहीं बंधी थी। यानि किसी अमेरिकन कर्मचारी के हाथों में उसकी लगाम नहीं थी। वह स्वच्छंद थी। उसकी अनुशासनात्मक स्वछंदता उसे और आकर्षक बनाने पर तुली थी। उसका चलना, सूंघना और देखना सब संयमित था। श्रीमान ट्रम्प जब प्रधान...