टेंशन में भगवान
टेंशन में भगवान लंबे समय से कोई भक्त मंदिर नहीं आया। जो पंडित पूजारी था वह भी लॉकडाउन की वजह से गांव चला गया। मंदिर में इधर उधर जो थोड़ा बहुत प्रसाद बिखरा था उसे पक्षी और स्वान चट कर गए। अब मंदिर में मंदिर वाली महक भी नहीं आ रही। सुबह से शाम तक अनेक महिलाएं घर परिवार की बतियाने चली आती थी, उनके साथ मेरा भी टाइम पास हो जाता था। मगर कई दिनों से किसी भी भक्त के चरण मंदिर की पौडिय़ों पर नहीं पड़े। दूर- दूर तक कोई दिखाई भी नहीं पड़ रहा। क्या वक्त आ गया है। कोई कुछ मांगने नहीं आ रहा है। लगता है सब के सब संपूर्ण हो गए हैं। किसी को किसी चीज़ जरूरत नहीं रही। अगर ऐसा हुआ तो तेरा क्या होगा कालिया? भगवान जी जोर से बोलने लगेे-अरे कठोर उपासको, कहां छुप गये तुम लोग। तुम्हारा चाहने वाला भगवन पल-पल भटक रहा है। तुम्हारी राह तकते-तकते आंखें पथरा गई हैं मेरी। अरे नासमझो, कुछ समझो, तुम्हारे बिना मेरा क्या जीना। मेरी तो हैसियत ही तुुम्हारी खैरियत पर टिकी है। अरे ओ पुजारी। तेरा ये प्यार का सागर सूखने पर आ गया है। कहां है तूं और कहां है तेरा जल वाला लोटा। अरे निर्दयी तूं आ जा और मेरे सिर पर ज...