हरियाणा, उत्तरप्रदेश व हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव होने जा रहे हैं। जो भाई-बहन चुनाव में उतरना चाहते हैं या राजनीति में करियर बनाना चाहते हैं, इस पुस्तक (शोध प्रबंध) को अवश्य पढ़ लें। उचित मार्गदर्शन मिलेगा। यह मैं यकीन के साथ कह रहा हूं।
इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट
कोरोनिल को घर में घुसकर मारा
कोरोनिल को घर में घुसकर मारा आयुर्वेद का जनक भारत। बावजूद इसके आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल पर इतनी जबरदस्त सर्जिकल स्ट्राइक हुई है कि आचार्य बालकृष्ण को प्रेस कांफ्रेंस में हाथ जोडक़र कहना पड़ा कि उन्होंने कोरोना की कोई दवा नहीं बनाई। आयुर्वेदिक दवा जरूर बनाई है जिससे कोरोना के मरीज ठीक हुए हैं। दवा का नाम कोरोनिल हो या कोरोनावटी, है तो कोरोना की दवा ही। इसमें इधर-उधर की बात करने से क्या फायदा। उनको अपनी बात पर अडिग रहना चाहिए था कि हां, उन्होंने जयपुर की मेडिकल यूनिवर्सिटी से मिलकर कोरोना की दवा बनाई है। अब किसी को खानी है तो खाइये, जबरदस्ती थोड़ा है। किसी को असर हो, किसी को ना हो। ये कोई जरूरी थोड़े है पैरासीटामोल से सभी का बुखार उतर जाता हो। कोई भी डाक्टर या दवा किसी मरीज को ठीक करने की गारंटी नहीं देते। डाक्टर व दवा अपना-अपना प्रयास करते हैं। ठीक तो मरीज को स्वयं होना होता है। यह नीति कोई कोरोना के मरीज पर लागू नहीं होती बल्कि हर प्रकार के मरीज पर लागू होती है। बाजार में खांसी की अनेक प्रकार की दवाइयां बिक रही हैं। अनेक कंपनियां बना रही हैं। किसी को कोई दवा असर कर जाए तो...
टेंशन में भगवान
टेंशन में भगवान लंबे समय से कोई भक्त मंदिर नहीं आया। जो पंडित पूजारी था वह भी लॉकडाउन की वजह से गांव चला गया। मंदिर में इधर उधर जो थोड़ा बहुत प्रसाद बिखरा था उसे पक्षी और स्वान चट कर गए। अब मंदिर में मंदिर वाली महक भी नहीं आ रही। सुबह से शाम तक अनेक महिलाएं घर परिवार की बतियाने चली आती थी, उनके साथ मेरा भी टाइम पास हो जाता था। मगर कई दिनों से किसी भी भक्त के चरण मंदिर की पौडिय़ों पर नहीं पड़े। दूर- दूर तक कोई दिखाई भी नहीं पड़ रहा। क्या वक्त आ गया है। कोई कुछ मांगने नहीं आ रहा है। लगता है सब के सब संपूर्ण हो गए हैं। किसी को किसी चीज़ जरूरत नहीं रही। अगर ऐसा हुआ तो तेरा क्या होगा कालिया? भगवान जी जोर से बोलने लगेे-अरे कठोर उपासको, कहां छुप गये तुम लोग। तुम्हारा चाहने वाला भगवन पल-पल भटक रहा है। तुम्हारी राह तकते-तकते आंखें पथरा गई हैं मेरी। अरे नासमझो, कुछ समझो, तुम्हारे बिना मेरा क्या जीना। मेरी तो हैसियत ही तुुम्हारी खैरियत पर टिकी है। अरे ओ पुजारी। तेरा ये प्यार का सागर सूखने पर आ गया है। कहां है तूं और कहां है तेरा जल वाला लोटा। अरे निर्दयी तूं आ जा और मेरे सिर पर ज...

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें