बॉक्स आफिस पर हिट होती ‘रिया-कंगना’

 व्यंग्य

बॉक्स आफिस पर हिट होती ‘रिया-कंगना’

माया नगरी में सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म का लाइव प्रसारण चल रहा है।  फिल्म दो मुख्य पात्रों के ईर्द गिर्द घूम रही है। ये पात्र हैं रिया और कंगना। हिट होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दोनों कलाकारों के आगे-पीछे पुलिस है।
कहानी जिस तरह से शुरू हुई है उससे लगता है यह फिल्म मेगा स्टार वाली बन जाएगी। स्टोरी अगर अपने बहाव में चली तो बड़े-बड़े कलाकार पर्दे पर नज़र आएंगे। मगर कुछ विषय विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यांतर के बाद स्टोरी बेजान होने लगेगी क्योंकि निर्देशक नहीं चाहेंगे कि चूहों को सबक सिखाने की जिद में पूरा घर जल जाए। घर बचाने की विवशता फिल्म के क्लाइमेक्स को प्रभावित करेगी। ऐसा अनुमान है।
कहानी की शुरुआत दमदार है। एक कलाकार की मौत से शुरु हुई यह कहानी कितने कलाकारों को अपने अंदर समेटेगी यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन वृतचित्र के लेखक बिना किसी को बताए इसकी कहानी गढ़ रहे हैं। बहुत से नामी कलाकार रब से दुआ कर रहे हैं कि उनको इस फिल्म में कोई भूमिका अदा करने की विवशता न मिले। कोई रोल न मिल जाए इसलिए वे घर से निकल भी नहीं रहे हैं और लाइव प्रसारण के बारे में कोई स्टेटमेंट भी नहीं दे रहे हैं।
अभी तक कुछ डायलॉग ऐसे भी हुए हैं जिनका इस कहानी से करीब का रिश्ता नहीं है। जैसे राज्य सरकर के साझीदार शरद पंवार का यह कहना कि बेकार में पब्लिसिटी की जा रही है। महेश भट्ïट की ओर से भी ऐसा ही डायलॉग बोला गया है जो दर्शकों को पसंद नहीं आया।
प्रस्तुत फिल्म में कोई स्टार रोल नहीं चाहता, वह इसलिए है क्योंकि यह हकीकत की फिल्म है। पर्दे पर दिखाई जाने वाली फिल्म नहीं है। वे सब जानते हैं कि ‘हकीकत की दुनिया में चाहत नहीं है।’

फिल्म के दोनों मुख्य कलाकार अपनी अपनी राह पर दिखाई दे रहे हैं। कंगना राष्टï्रीय चरित्र की भूमिका में आ गई हैं। उनको न केवल अवाम के लोगों की ओर से बल्कि केंद्र की ओर से भी तालियां मिल रही हंै। जबकि रिया जूर्म की ऐसी दलदल में फंस गई हैं जहां से निकलना आसान नहीं है। ठीक उसी तरह की दलदल जैसी खलनायकों द्वारा बनाई जाती है।  

दोनों महिला किरदारों का सीधा-सीधा कोई संबंध नजर नहीं आता, लेकिन संबंध है। फिल्म की शुरुआत ही ऐसे ङ्क्षबदू से हुई थी जैसे ‘बीस साल बाद’ फिल्म में होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां सुशांत की मौत के 20 दिन बाद शुरू हुई है। सुशांत की मौत के मामले में मुंबई पुलिस की कार्रवाही पर कंगना रनौत ने ढिलाई का आरोप लगाया था। वहीं से महाराष्टï्र सरकार के नुमाइंदों व कंगना के बीच खटपट प्रारम्भ हो गई थी।
फिल्म कई नए मोड़ ले चुकी है। माया नगरी में नशे के साम्राज्य की परतें खुल रही हैं। ‘रानी लक्ष्मीबाई’ व राज्य सरकार आमने सामने खड़े हैं। सीबीआई अपने लक्ष्य की राह में ठिठक गई है। संजय राउत बोल रहे हैं कि कंगना जो बोल रही है वे किसी और के डायलॉग बोल रही हैं, यह फाल्स डबिंग है। जबकि कंगना का कहना है कि संजय और ठाकरे जो धुन निकाल रहे हैं उसमें पीओके की फीलिंग आ रही है।
कुल मिलाकर फिलहाल तो कहानी में शोले वाली ट्रेन चल रही है और डाकुओं की फायरिंग जारी है।
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